ADHD Full Form in Hindi




ADHD Full Form in Hindi, ADHD का Full Form क्या है, ADHD क्या होता है, एडीएचडी क्या है, ADHD का पूरा नाम और हिंदी में क्या अर्थ होता है, ऐसे सभी सवालो के जबाब आपको इस Post में मिल जायेंगे.

ADHD Full Form in Hindi - एडीएचडी क्या होता है

ADHD की फुल फॉर्म Attention Deficit Hyperactivity Disorder होती है. इसको हिंदी मे ध्यान आभाव सक्रियता विकार कहते है. ADHD यानी अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर दिमाग से संबंधित अव्यवस्था है जो बच्‍चो और बड़ो दोनों को होता है. बच्‍चो में इस रोग के होने की ज्‍यादा संभावना होती है. ADHD बीमारी के होने पर आदमी का व्‍यवहार बदल जाता है और याद्दाश्‍त भी कमजोर हो जाती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो ADHD का मतलब है, किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का सही उपयोग नहीं कर पाना.

माना जाता है कि अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर कुछ रसायनो के इस्तेमाल से दिमाग की कमज़ोरी की वजह से ये कमी होती है. एक अनुमान के मुताबिक स्‍कूल के बच्‍चो को ADHD 4% से 12% के बीच प्रभावित करता है.

यह लड़कियो की तुलना मे लड़को को ज्यादा होती है. एक अध्ययन के मुताबिक पिछले 20 वर्षों मे ADHD के मरीजो की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. इस बीमारी के बढ़ने का कारण यह भी है कि इसका Diagnosis अधिक लोगो मे हो रहा है. और बच्चो और बड़ो मे इस रोग के लक्षण अलग अलग हो सकते है.

ADHD के बच्चो मे लक्षण

  • क्लास मे अक्सर चिल्लाना

  • अपनी बारी का इंतज़ार ना कर पाना संयम ना रख पाना

  • एक जगह पर ना बैठ पाना, व्याकुल रहना

  • बाते भूलना व बहुत ज्यादा चंचल होना

  • किसी भी कार्य को सही ढंग से ना करना

ADHD के बड़ो मे लक्षण

  • आसानी से किसी भी चीज से ध्यान हट जाना

  • अक्सर बाते भूल जाना

  • अक्सर बातो मे टालमटोल करना

  • हमेशा उदासी भरा रहना

  • डिप्रेशन मे रहना

  • जल्द ही किसी भी बात पर बेचैन होना

  • ड्रग या किसी और नशीली चीज़ की लत होना

ADHD से निदान के लिए कोई एक परीक्षण नही है. इसके लक्षणो के आधार पर ही इस ADHD का निदान संभव है. अगर आपके बच्‍चे का व्‍यवहार इस बीमारी से मेल करता है तो इस आधार पर इस अव्यवस्था का निदान होता है. इसके लिए विशेषज्ञ बच्‍चे की मेडिकल हिस्‍ट्री की जांच कर सकता है वह परिवार के अन्‍य सदस्‍यो से इस बारे मे पूछ सकता है.

इसके अलावा चिकित्‍सक यह भी देखता है कि बच्‍चे को कोई अन्‍य परेशानी तो नही है जिसके कारण वह ऐसा व्‍यवहार कर रहा है. इसके बाद सुनने और देखने की क्षमता, चिंता, अवसाद या अन्य व्यवहार समस्याओं की जांच की जाती है. इसके लिए अपने बच्चे को एक विशेषज्ञ आमतौर पर मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक या न्यूरोलॉजिस्ट के पास परीक्षण के लिए भेजिए.


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